ठगी अलर्ट
“डिजिटल अरेस्ट”
“पुलिस” या “CBI” का वीडियो कॉल कहता है कि आप गिरफ़्तार हैं और नाम साफ़ करने के लिए पैसे भेजें।
ऐसा दिखता है
+92 3xx xxx xx41 (वीडियो कॉल)
मैं मुंबई साइबर क्राइम से बोल रहा हूँ। आपके आधार पर ड्रग्स और 5 पासपोर्ट वाला पार्सल बुक हुआ है। आप डिजिटल अरेस्ट में हैं। कॉल न काटें, किसी को न बताएँ। अपनी जमा-पूँजी RBI वेरिफ़िकेशन खाते में भेजें।
ठगीठगी कैसे होती है
- कॉल पर कहा जाता है कि आपके नाम का पार्सल, सिम या बैंक खाता किसी अपराध में इस्तेमाल हुआ।
- फिर वीडियो कॉल पर वर्दी वाले लोग दिखते हैं, पीछे नकली थाना या अदालत।
- कॉल काटने या घरवालों को बताने से मना करते हैं, कई बार घंटों या दिनों तक।
- पैसा “सुरक्षित” या “वेरिफ़िकेशन” खाते में भेजने को कहते हैं। वह कभी वापस नहीं आता।
ख़तरे के संकेत
- भारतीय क़ानून में “डिजिटल अरेस्ट” जैसी कोई चीज़ नहीं है।
- पुलिस, CBI, ED, कस्टम या अदालत कभी वीडियो कॉल पर गिरफ़्तारी या पूछताछ नहीं करते।
- कोई सरकारी एजेंसी पैसा “वेरिफ़ाई” करने के लिए ट्रांसफ़र नहीं करवाती।
- धमकी, राज़ रखने को कहना और कॉल पर बनाए रखना ही ठगी है।
क्या करें
- कॉल काट दें। आप गिरफ़्तार नहीं हैं।
- तुरंत परिवार के किसी सदस्य को बताएँ।
- पैसे भेज दिए हों तो फ़ौरन 1930 पर कॉल करें और cybercrime.gov.in पर शिकायत करें।
- नंबर की शिकायत चक्षु (संचार साथी) पर करें।